Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 274
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1“सोऽकामयत” मंत्र गोविंद राधे।
2कह प्रकृति सृष्टि का हेतु ना बता दे॥ 3139॥
3यदि तत् सशक्तिक न गोविंद राधे।
4सृष्टि संकल्प कैसे करेगा बता दे॥ 3140॥
5प्रकाश रूप ब्रह्म गोविंद राधे।
6अविद्या अधीन ब्रह्म नाश बता दे॥ 3141॥
7“भोगमात्रसाम्य” सूत्र गोविंद राधे।
8ब्रह्म जीव सुख में ही समता बता दे॥ 3142॥
9“जगद्व्यापार” सूत्र गोविंद राधे।
10ब्रह्म को ही सृष्टि अधिकार बता दे॥ 3143॥
11सृष्टि कर्म आपु करे गोविंद राधे।
12आनन्द मात्र भोग जीव को करा दे॥ 3144॥
13ब्रह्म में हैं आठ गुण गोविंद राधे।
14याते ब्रह्म निर्गुण सगुण बता दे॥ 3145॥
15ब्रह्म में आठ गुण गोविंद राधे।
16स्वभावतः रहते नित्य बता दे॥ 3146॥
17भक्तों को आठ गुण गोविंद राधे।
18भगवत्कृपा ते ही मिलते बता दे॥ 3147॥
19मुक्त के आठ गुण गोविंद राधे।
20परमात्मा आधीन बता दे॥ 3148॥
21अगणित दिव्य गुण गोविंद राधे।
22हरि में हैं याते हरि सगुण बता दे॥ 3149॥
23माया के तीन गुण गोविंद राधे।
24हरि में नहीं हैं याते निर्गुण बता दे॥ 3150॥