Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 273
Reading 284 of 516 · Source nos. 3127–3138 · Source PDF 290
1पुरु षोत्तम ब्रह्म गोविंद राधे।
2गुह्यतम सर्वश्रेष्ठ गीता बता दे॥ 3127॥
3ब्रह्म मन बुद्घि पर गोविंद राधे।
4याते है अनिर्वचनीय बता दे॥ 3128॥
5चर्म चक्षु ग्राह्य नहिं गोविंद राधे।
6याते वेद कृष्ण को अरूप बता दे॥ 3129॥
7“यः सर्वज्ञः” मंत्र गोविंद राधे।
8ब्रह्म को सगुण साकार बता दे॥ 3130॥
9वेदान्त सूत्र कह गोविंद राधे।
10“ज्ञोऽतएव” ब्रह्म सर्वज्ञ बता दे॥ 3131॥
11शंकर कह पूर्व ते गोविंद राधे।।
12पर मंत्र हो बलवान बता दे॥ 3132॥
13“अपहृतपाप्मा” मंत्र गोविंद राधे।
14ब्रह्म को सत्य संकल्प बता दे॥ 3133॥
15यदि पर बलवान गोविंद राधे।
16ब्रह्म सत्य संकल्प मान लो बता दे॥ 3134॥
17ब्रह्म की सत्ता है गोविंद राधे।
18सत्ता युक्त ब्रह्म सविशेष है बता दे॥ 3135॥
19“परास्य शक्तिः” मंत्र गोविंद राधे।
20ब्रह्म में ज्ञान बल क्रिया है बता दे॥ 3136॥
21हरि की अनन्त शक्ति गोविंद राधे।
22ज्ञान इच्छा क्रिया तीन मुख्य बता दे॥ 3137॥
23ज्ञान शक्ति संवित् है गोविंद राधे।
24बल संधिनी क्रिया ह्लादिनी बता दे॥ 3138॥