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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 272

Reading 283 of 516 · Source nos. 3115–3126 · Source PDF 289

1ब्रह्म तो है मायाधीश गोविंद राधे।

2जीव मायाधीन कैसे अंश बता दे॥ 3115॥

3ब्रह्म तो अखण्ड रूप गोविंद राधे।

4उसका खण्ड अंश जीव कैसे बता दे॥ 3116॥

5ब्रह्म शक्ति परा जीव गोविंद राधे।

6याते ब्रह्म अंश जीव कहा है बता दे॥ 3117॥

7हरि के बिना नाहिं गोविंद राधे।

8जीव की कोई सत्ता बता दे॥ 3118॥

9अग्नि न हो जो तो गोविंद राधे।

10चिनगारी की सत्ता क्या है बता दे॥ 3119॥

11सिन्धु न हो जो तो गोविंद राधे।

12तरंग की है क्या सत्ता बता दे॥ 3120॥

13जलनिधि एक है गोविंद राधे।

14उसकी तरंगें अनंत बता दे॥ 3121॥

15ऐसे हरि एक ही हैं गोविंद राधे।

16उनके हैं जीव अनन्त बता दे॥ 3122॥

17नाता तो तरंगों का गोविंद राधे।

18जलनिधि ते ही होता नित्य बता दे॥ 3123॥

19ऐसे ही जीवों का गोविंद राधे।

20नाता हरि ही ते है रहेगा बता दे॥ 3124॥

21क्षर ब्रह्म को गुह्य गोविंद राधे।

22अक्षर गुह्यतर गीता बता दे॥ 3125॥

23क्षर ते अतीत अरु गोविंद राधे।

24अक्षर अतीत पुरुषोत्तम बता दे॥ 3126॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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