Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 271
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1प्रमुख प्रमाण वेद गोविंद राधे।
2कछु अद्वैती व्यावहारिक बता दे॥ 3103॥
3स्वतःप्रमाण वेद गोविंद राधे।
4लक्षणावृत्ति वेद अर्थ नसा दे॥ 3104॥
5केवलाद्वैतवादी गोविंद राधे।
6सिद्धान्त ब्रह्म निःशक्तिक बता दे॥ 3105॥
7यदि ब्रह्म निःशक्तिक गोविंद राधे।
8संकल्प करने में अक्षम बता दे॥ 3106॥
9ब्र्रह्म संकल्पहीन गोविंद राधे।
10सृष्टि कर्म में हो अक्षम बता दे॥ 3107॥
11विधि हरि हर तीनों गोविंद राधे।
12जगत की सृष्टि रक्षा प्रलय करा दे॥ 3108॥
13विधि हरि हर में तो गोविंद राधे।
14व्याप्त कृष्ण ही तीनों कर्म करा दे॥ 3109॥
15तनु चालक आत्मा ज्यों गोविंद राधे।
16जग चालक त्यों हरि हैं बता दे॥ 3110॥
17“तस्य त्वं” उसका तू गोविंद राधे।
18“तत्वमसि” मंत्र का अर्थ बता दे॥ 3111॥
19“तस्मात् त्वं”ं उससे तू गोविंद राधे।
20“तत्वमसि” मंत्र का अर्थ बता दे॥ 3112॥
21कारणावस्थ तत् गोविंद राधे।
22कार्यावस्थ ब्रह्म त्वं है बता दे॥ 3113॥
23“तत्त्वमसि” मंत्र में तो गोविंद राधे।
24“तत्” श्रीकृष्ण “त्वं” है जीव बता दे॥ 3114॥