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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 270

Reading 281 of 516 · Source nos. 3091–3102 · Source PDF 287

1ब्रह्म तो है निष्क्रिय गोविंद राधे।

2प्रतिबिम्ब ईश्वर स्रष्टा क्यों बता दे॥ 3091॥

3ब्रह्म में अनंत शक्ति गोविंद राधे।

4अद्वैती निःशक्तिक बता दे॥ 3092॥

5ब्रह्म यदि प्रकाशमात्र गोविंद राधे।

6आनन्द उसमें कै से हो बता दे॥ 3093॥

7अनुकूल अनुभूति गोविंद राधे।

8आनन्द कहलाता है बता दे॥ 3094॥

9प्रकाश की तो नहिं गोविंद राधे।

10अनुकूल अनुभूति होती बता दे॥ 3095॥

11ब्रह्म अव्यक्त शक्तिक गोविंद राधे।

12स्वरूप शक्ति व्यक्त ना हो बता दे॥ 3096॥

13सत्ता अरु आनन्द गोविंद राधे।

14रक्षा के हेतु शक्ति ब्रह्म में बता दे॥ 3097॥

15षडैश्वर्य पूर्ण ब्रह्म गोविंद राधे।

16अद्वैती निराकार ही बता दे॥ 3098॥

17कल्पित अर्थ द्वारा गोविंद राधे।

18कछु अद्वैती जग भ्रम फैला दे॥ 3099॥

19ब्रह्म सूत्र मुख्य अर्थ गोविंद राधे।

20तजि अद्वैती गौण अर्थ बता दे॥ 3100॥

21ब्रह्मसूत्र सूर्य सम गोविंद राधे।

22अद्वैत अर्थ मेघाच्छन्न करा दे॥ 3101॥

23अभिधा वृत्ति तजि गोविंद राधे।

24लक्षणा वृत्ति ते अर्थ करा दे॥ 3102॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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