Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 269
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1न्याय, सांख्य, अद्वैती गोविंद राधे।
2आत्मा को विभु, भक्त अणु है बता दे॥ 3079॥
3जीव अणु चित्कण गोविंद राधे।
4अच्छेद्य अरु अक्लेद्य बता दे॥ 3080॥
5जीव ज्ञाता कर्ता भोक्ता गोविंद राधे।
6दह्य शोष्य भी ना अक्षर है बता दे॥ 3081॥
7आत्मा जो कर्ता नहिं गोविंद राधे।
8तो वेदान्त ज्ञान किसको बता दे॥ 3082॥
9आत्मा है कर्ता मंत्र गोविंद राधे।
10“मुमुक्षुर्ब्रह्मोपासीत” बता दे॥ 3083॥
11“यजेत स्वर्गकामः” गोविंद राधे।
12मंत्र कह आत्मा कर्ता बता दे॥ 3084॥
13“कर्ता शास्त्रार्थवत्” गोविंद राधे।
14ब्रह्म सूत्र कह जीव कर्ता बता दे॥ 3085॥
15जीव अकर्ता तो गोविंद राधे।
16वेदादि उपदेश क्यों हैं बता दे॥ 3086॥
17जीव को शास्त्र वेद गोविंद राधे।
18ज्ञाता अरु ज्ञान स्वरूप बता दे॥ 3087॥
19“एष हि द्रष्टा” मंत्र गोविंद राधे।
20जीव को द्रष्टा, ज्ञाता, कर्ता बता दे॥ 3088॥
21मायायुक्त जीव कर्ता गोविंद राधे।
22केवल जीव तो अकर्ता बता दे॥ 3089॥
23अद्वैत मत ते तो गोविंद राधे।
24ब्रह्म प्रतिबिम्ब ईश्वर है बता दे॥ 3090॥