Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 267
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1तू ब्रह्म कैसे है गोविंद राधे।
2सर्वनियन्ता तू कहाँ है बता दे॥ 3055॥
3तू ब्रह्म कैसे है गोविंद राधे।
4वेद तो जीव ब्रह्म पृथक बता दे॥ 3056॥
5आत्मा तो नित्य शुद्ध गोविंद राधे।
6अव्यय क्षेत्रज्ञ आश्रय बता दे॥ 3057॥
7आत्मा तो अविकारी गोविंद राधे।
8अनावृत हेतु तनु व्यापी बता दे॥ 3058॥
9जीव ज्ञानाश्रय गोविंद राधे।
10ज्ञान गुण अरु चेतन है बता दे॥ 3059॥
11नर, पशु, पक्षी आदि गोविंद राधे।
12तब लौं जीव जब लौं चेतना बता दे॥ 3060॥
13चेतना के जाते ही गोविंद राधे।
14जग उसे जीव नहिं मृतक बता दे॥ 3061॥
15याते जीव के साथ गोविंद राधे।
16चेतना का सम्बन्ध नित्य है बता दे॥ 3062॥
17जीव का चेतन ते है गोविंद राधे।
18सम्बन्ध जड़ ते नहीं है बता दे॥ 3063॥
19महाप्रलय में तो गोविंद राधे।
20जीव ही रहे जड़ देह ना बता दे॥ 3064॥
21जीव अजन्मा है गोविंद राधे।
22एक रूप, प्रकृति ते परे है बता दे॥ 3065॥
23कछु अद्वैती कह गोविंद राधे।
24नाना जीव कछु एक जीव है बता दे॥ 3066॥