Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 266
Reading 277 of 516 · Source nos. 3043–3054 · Source PDF 283
1आग को न जाने शिशु गोविंद राधे।
2याते न शीतल आग हो बता दे॥ 3043॥
3यदि अज्ञान नित्य गोविंद राधे।
4हो अद्वैत की सिद्धि ना बता दे॥ 3044॥
5यदि अज्ञान सादि गोविंद राधे।
6सांत तो पुनि आ जाये बता दे॥ 3045॥
7यदि साद्यनंत कह गोविंद राधे।
8अज्ञान तो कभु जाये ना बता दे॥ 3046॥
9जो अनादि सांत कह गोविंद राधे।
10ब्रह्म ते प्रकट जग नित्य बता दे॥ 3047॥
11तू ब्रह्म कैसे है गोविंद राधे।
12तुझमें षडैश्वर्य कहाँ है बता दे॥ 3048॥
13तू ब्रह्म कैसे है गोविंद राधे।
14तू सर्व व्यापक कहाँ है बता दे॥ 3049॥
15तू ब्रह्म कैसे है गोविंद राधे।
16सर्वज्ञता तेरी कहाँ है बता दे॥ 3050॥
17तू ब्रह्म कैसे है गोविंद राधे।
18तू जग स्रष्टा आदि कहाँ है बता दे॥ 3051॥
19तू ब्रह्म कैसे है गोविंद राधे।
20तू भी मायाधीश है क्या बता दे॥ 3052॥
21तू ब्रह्म कैसे है गोविंद राधे।
22ब्रह्म को भी भ्रम हुआ कैसे बता दे॥ 3053॥
23तू ब्रह्म कैसे है गोविंद राधे।
24ज्ञान को भी अज्ञान कैसे मिटा दे॥ 3054॥