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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 264

Reading 275 of 516 · Source nos. 3019–3030 · Source PDF 281

1“सर्वाजीवे” वेद मंत्र गोविंद राधे।

2जीव अरु ब्रह्म को पृथक बता दे॥ 3019॥

3“रसो वै सः” मंत्र गोविंद राधे।

4जीव ब्रह्म दोनों को पृथक बता दे॥ 3020॥

5“तमेव विदित्वा” मंत्र गोविंद राधे।

6जीव अरु ब्रह्म हैं पृथक बता दे॥ 3021॥

7“अथ यदिदमस्मिन्” मंत्र गोविंद राधे।

8जीव ब्रह्म दो तत्व पृथक बता दे॥ 3022॥

9“भेदव्यपदेशात्” गोविंद राधे।

10सूत्र जीव ते ब्रह्म पृथक बता दे॥ 3023॥

11जीव ब्रह्म दो तत्व गोविंद राधे।

12“भेदव्यपदेशाच्चान्यः” बता दे॥ 3024॥

13“अधिकोपदेशात्” गोविंद राधे।

14सूत्र ब्रह्म जीव को तो भिन्न बता दे॥ 3025॥

15जीव ब्रह्म भिन्न सूत्र गोविंद राधे।

16“अधिकं तु भेदनिर्देशात्” बता दे॥ 3026॥

17“मुक्तोपसृप्य व्यपदेशात्” गोविंद राधे।

18जीव ब्रह्म पृथक पृथक ही बता दे॥ 3027॥

19“न अणुः अतच्छ्रुतेः” गोविंद राधे।

20ब्रह्म सूत्र ब्रह्म का स्वरूप बता दे॥ 3028॥

21“स्थित्यदनाभ्यां” गोविंद राधे।

22जीव ब्रह्म दोनोें हैं पृथक बता दे॥ 3029॥

23“गति शब्दाभ्यां” गोविंद राधे।

24जीव ब्रह्म दोनों को पृथक बता दे॥ 3030॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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