Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 262
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1“एषोणुरात्मा” मंत्र गोविंद राधे।
2जीव को विभु नहिं अणु है बता दे॥ 2995॥
3“अणु प्रमाणात्” मंत्र गोविंद राधे।
4जीव को विभु नहिं अणु है बता दे॥ 2996॥
5“बालाग्रशतभागस्य” गोविंद राधे।
6जीव को विभु नहिं अणु है बता दे॥ 2997॥
7“आराग्रमात्रो ह्यवरः” गोविंद राधे।
8मंत्र भी जीव की अणुता बता दे॥ 2998॥
9“स वा एष आत्मा” मंत्र गोविंद राधे।
10जीव का वास है हृदय में बता दे॥ 2999॥
11“अभ्युपगमात्” सूत्र गोविंद राधे।
12जीव का निवास है हृदय बता दे॥ 3000॥
13गीता पुराण आदि गोविंद राधे।
14जीव को अणु हृदयस्थ बता दे॥ 3001॥
15कछु ज्ञानी कह जीव गोविंद राधे।
16है अनादि नित्य याते अणु ना बता दे॥ 3002॥
17विश्व तनु उत्पन्न गोविंद राधे।
18क्या दोनों उत्पन्न अणु हैं बता दे॥ 3003॥
19यदि अनुत्पन्न तत्व गोविंद राधे।
20विभु है तो माया क्या विभु है बता दे॥ 3004॥
21“पादोस्य विश्वा” मंत्र गोविंद राधे।
22जीव को ब्रह्म का अंश बता दे॥ 3005॥
23“अंशो नाना” ब्रह्म सूत्र गोविंद राधे।
24जीव को ब्रह्म का अंश बता दे॥ 3006॥