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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 260

Reading 271 of 516 · Source nos. 2971–2982 · Source PDF 277

1आप की लीला को गोविंद राधे।

2केवल आप ही जानें बता दे॥ 2971॥

3अजन्मा होके भी गोविंद राधे।

4नाना रूप धरें दिव्य बता दे॥ 2972॥

5जब योगमाया ते गोविंद राधे।

6आप करें जग में लीला बता दे॥ 2973॥

7कौन है ऐसा जो गोविंद राधे।

8जानि सके लीला रहस्य बता दे॥ 2974॥

9आप रहें सब उर गोविंद राधे।

10सब के कर्मों के साक्षी बता दे॥ 2975॥

11आप की कृपा बिनु गोविंद राधे।

12योग ज्ञान जप सब व्यर्थ बता दे॥ 2976॥

13ऐसी कृपा करो गोविंद राधे।

14सदा रहुँ शरण चरण की बता दे॥ 2977॥

15चार हैं अभेद भक्ति गोविंद राधे।

16जगत भी ब्रह्म ही है पहली बता दे॥ 2978॥

17दूसरी अभेद भक्ति गोविंद राधे।

18जग ते परे है ब्रह्म ज्ञानी को बता दे॥ 2979॥

19तीसरी अभेद भक्ति गोविंद राधे।

20जगत है ब्रह्म वह मैं हूँ बता दे॥ 2980॥

21चौथी अभेद भक्ति गोविंद राधे।

22जग ते परे है ब्रह्म वह मैं बता दे॥ 2981॥

23ज्ञानी कह आत्मा ब्रह्म गोविंद राधे।

24भक्त आत्मा की आत्मा ब्रह्म बता दे॥ 2982॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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