Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 259
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1ब्रह्मा ने कहा कृष्ण गोविंद राधे।
2आप ही एकमात्र सत्य बता दे॥ 2959॥
3पुनि मैं हूँ रजोगुणी गोविंद राधे।
4आपके स्वरूप को न जानूँ बता दे॥ 2960॥
5अपने आप को ही गोविंद राधे।
6जग का स्वामी मान बैठा बता दे॥ 2961॥
7जग का विधाता मैं गोविंद राधे।
8पुनि हूँ अजन्मा यह गर्व था बता दे॥ 2962॥
9आपने कृपा किया गोविंद राधे।
10मेरा गर्व नष्ट कर दिया है बता दे॥ 2963॥
11हे श्रीकृष्ण! अब गोविंद राधे।
12मेरा अपराध क्षमा कीजिये बता दे॥ 2964॥
13बच्चा माँ के पेट गोविंद राधे।
14बार बार हाथ पैर मारे बता दे॥ 2965॥
15किन्तु माँ उसको गोविंद राधे।
16अपराध माने ना, सुखी हो बता दे॥ 2966॥
17ऐसे अज्ञानवश गोविंद राधे।
18मेरा अपराध हो क्षम्य बता दे॥ 2967॥
19आप तो हैं आत्मा गोविंद राधे।
20सब जीवात्माओं की बता दे॥ 2968॥
21जीव अरु जगत के गोविंद राधे।
22आप ही एकमात्र स्वामी बता दे॥ 2969॥
23समस्त लोकों के गोविंद राधे।
24आप ही एकमात्र साक्षी बता दे॥ 2970॥