Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 258
Reading 269 of 516 · Source nos. 2947–2958 · Source PDF 275
1काल स्वभाव आदि गोविंद राधे।
2कर रहे कृष्ण उपासना बता दे॥ 2947॥
3सब थे स्वयं प्रकाश गोविंद राधे।
4सब अनन्त आनन्दरूप बता दे॥ 2948॥
5ब्रह्मा ने अब जाना गोविंद राधे।
6कृष्ण ही बने हैं सब रूप बता दे॥ 2949॥
7ब्रह्मा की दशा ऐसी गोविंद राधे।
8जैसे हो कोई शिलामूर्ति बता दे॥ 2950॥
9कृष्ण ने हटाया माया गोविंद राधे।
10तब ब्रह्मा को भई चेतना बता दे॥ 2951॥
11दही भात हाथ लिये गोविंद राधे।
12कृष्ण को देखा पुनि पूर्ववत् बता दे॥ 2952॥
13पुनि ब्रह्माहंस ते गोविंद राधे।
14कूदि परे गिरे पद कृष्ण के बता दे॥ 2953॥
15निज चार मुकुटों ते गोविंद राधे।
16कृष्ण पद का किया स्पर्श बता दे॥ 2954॥
17ऐसे ही देर तक गोविंद राधे।
18कृष्ण चरणों में गिरे पड़े थे बता दे॥ 2955॥
19धीरे धीरे ब्रह्मा उठे गोविंद राधे।
20आँसू पोछा अरु किये अस्तुति बता दे॥ 2956॥
21जब हुआ ब्रह्मा का गोविंद राधे।
22मोह भंग, हुआ कृष्णज्ञान बता दे॥ 2957॥
23तब किया ब्रह्मा ने गोविंद राधे।
24कृष्ण भगवान की अस्तुति बता दे॥ 2958॥