Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 257
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1ऐसे ही कृष्ण आगे गोविंद राधे।
2ब्रह्मा का हाल बुरा हो गया बता दे॥ 2935॥
3ब्रह्मा के सोचते ही गोविंद राधे।
4सोचते हुई नई लीला बता दे॥ 2936॥
5सब ग्वाल गाय वत्स गोविंद राधे।
6ब्रह्मा को दीखे कृष्ण रूप ही बता दे॥ 2937॥
7कृष्ण के समान सब गोविंद राधे।
8शंख चक्र गदा पद्मयुक्त बता दे॥ 2938॥
9सब का था श्याम वर्ण गोविंद राधे।
10सब ही थे पीत पट धारी बता दे॥ 2939॥
11सबके सिर मोर पंख गोविंद राधे।
12कान कुण्डल गल हार बता दे॥ 2940॥
13वक्ष में श्री वत्स गोविंद राधे।
14बाजुओं में बाजूबंद बता दे॥ 2941॥
15कमर में करधनी गोविंद राधे।
16पग में नूपुर सुघर बता दे॥ 2942॥
17नख ते शिख तक गोविंद राधे।
18सब शृंगार था कृष्ण का बता दे॥ 2943॥
19मुख मृदु मुसकनि गोविंद राधे।
20तिरछी चितवनि सब की बता दे॥ 2944॥
21ब्रह्मा ने देखा अन्य गोविंद राधे।
22ब्रह्मा विष्णु कर रहे पूजा बता दे॥ 2945॥
23अणिमादि आठ सिद्धि गोविंद राधे।
24माया विद्या महत् घेरे हैं बता दे॥ 2946॥