Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 255
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1ऐसा लग रहा था गोविंद राधे।
2मानो गायों के पैर दो बता दे॥ 2911॥
3बछड़ों केपास आईं गोविंद राधे।
4बड़े चाव ते लगीं चाटने बता दे॥ 2912॥
5बूढ़े ग्वाल क्रुद्ध हुए गोविंद राधे।
6नीचे देखा निज निज ग्वाल भी बता दे॥ 2913॥
7तब क्रोध भाग गया गोविंद राधे।
8निज सुत को लगाया उर ते बता दे॥ 2914॥
9ग्वाल गाय ग्वालिनों का गोविंद राधे।
10देखा वर्धमान प्रेम राम ने बता दे॥ 2915॥
11राम को अचम्भा लगा गोविंद राधे।
12क्योंकि यह लीला राम जानें ना बता दे॥ 2916॥
13बलराम सोचें मन गोविंद राधे।
14यह माया देव या दैत्य की बता दे॥ 2917॥
15नहीं नहीं यह तो है गोविंद राधे।
16मेरे ही कन्हैया की माया बता दे॥ 2918॥
17जब दिव्य दृष्टि ते गोविंद राधे।
18राम ने देखा सब कृष्ण हैं बता दे॥ 2919॥
19राम ने कहा श्याम गोविंद राधे।
20तुम ग्वाल गाय रूप क्यों हो बता दे॥ 2920॥
21श्याम ने कहा राम गोविंद राधे।
22ब्रह्मा का मद मारना है बता दे॥ 2921॥
23अब आये ब्रह्मा जी गोविंद राधे।
24एक वर्ष बाद पुनि ब्रज में बता दे॥ 2922॥