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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 254

Reading 265 of 516 · Source nos. 2899–2910 · Source PDF 271

1कृष्ण भी उन जैसा गोविंद राधे।

2पुत्र भाव दिखला रहे थे बता दे॥ 2899॥

3दिन प्रतिदिन ऐसे गोविंद राधे।

4ब्रजवासियों का प्रेम बढ़ा था बता दे॥ 2900॥

5एक वर्ष बीत गया गोविंद राधे।

6कृष्ण की योगमाया लीला में बता दे॥ 2901॥

7जब एक वर्ष में गोविंद राधे।

8पाँच छे रातें थीं शेष बता दे॥ 2902॥

9तब एक दिन श्याम गोविंद राधे।

10राम संग गये गो चराने बता दे॥ 2903॥

11गायें गोवर्धन की गोविंद राधे।

12घास हरी हरी चर रही थीं बता दे॥ 2904॥

13गायों ने गिरि ते ही गोविंद राधे।

14निज निज बछड़ों को देखा बता दे॥ 2905॥

15पुनि उन गायों के गोविंद राधे।

16उर वात्सल्य प्रेम उमड़ा बता दे॥ 2906॥

17सब गायें सुध बुध गोविंद राधे।

18खो बैठीं भागीं जोर ते बता दे॥ 2907॥

19ग्वालों के रोकने ते गोविंद राधे।

20रुकी नाहिं और तेज भागीं बता दे॥ 2908॥

21गायों केथनों ते तो गोविंद राधे।

22दूध की धार थी बहती बता दे॥ 2909॥

23पूँछ अरु निज सिर गोविंद राधे।

24ऊपर उठा गाय भागीं बता दे॥ 2910॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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