लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 253

Reading 264 of 516 · Source nos. 2887–2898 · Source PDF 270

1बार बार चिपटाया गोविंद राधे।

2पुनि निज दूध पिलाया बता दे॥ 2887॥

3प्रतिदिन ऐसे ही गोविंद राधे।

4ग्वाल बनि लौटे श्रीकृष्ण बता दे॥ 2888॥

5पूर्व बालकोें का सा गोविंद राधे।

6सब व्यवहार करें कृष्ण बता दे॥ 2889॥

7ग्वाल मातायें भी गोविंद राधे।

8निज सुत जानि करें प्रेम बता दे॥ 2890॥

9उबटन लगावें अरु गोविंद राधे।

10नहलावें और धुलावें बता दे॥ 2891॥

11वस्त्र पहिनावें अरु गोविंद राधे।

12भाल में लगावें दिठौना बता दे॥ 2892॥

13भोजन करावें अरु गोविंद राधे।

14भाँति भाँति लाड़ लड़ावें बता दे॥ 2893॥

15गायें भी बछड़ों को गोविंद राधे।

16पूर्ववत् करें लाड़ प्यार बता दे॥ 2894॥

17बछड़ों को जीभ ते गोविंद राधे।

18चाटें अरु दूध पिलावें बता दे॥ 2895॥

19ग्वालिनों गोपों का गोविंद राधे।

20मातृ भाव पूर्ववत् ही था बता दे॥ 2896॥

21ग्वालिनों गायों का गोविंद राधे।

22निज सुत पै प्रेम अधिक था बता दे॥ 2897॥

23प्रेम अधिक क्यों है गोविंद राधे।

24ग्वालिनें गाय नाहिं जानीं बता दे॥ 2898॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version