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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 251

Reading 262 of 516 · Source nos. 2863–2874 · Source PDF 268

1बाँये हाथ में मधुर गोविंद राधे।

2घृत मिश्रित दही भात था बता दे॥ 2863॥

3अदरक नींबू आदि गोविंद राधे।

4अचार भी हाथ में ही था बता दे॥ 2864॥

5चटपटी बातों ते गोविंद राधे।

6कृष्ण हँसाते थे गोप को बता दे॥ 2865॥

7भूख अरु प्यास रहित गोविंद राधे।

8कृष्ण ब्रह्म हैं ग्वाल जानें ना बता दे॥ 2866॥

9इतने में गायें भी गोविंद राधे।

10घास चरते गईं दूर बता दे॥ 2867॥

11कृष्ण ने कहा मित्रों गोविंद राधे।

12भोजन करो डरो नेकु ना बता दे॥ 2868॥

13मैं ही अभी जाके गोविंद राधे।

14गायों को ले आता हूँ बता दे॥ 2869॥

15ब्रह्मा तो पहले ही गोविंद राधे।

16आकाश में विद्यमान थे बता दे॥ 2870॥

17ब्रह्मा ग्वाल गाय वत्स गोविंद राधे।

18ले गये उठा के माया ते बता दे॥ 2871॥

19कृष्ण जब लौटे देखा गोविंद राधे।

20खाते हुए ग्वाल भी नहीं थे बता दे॥ 2872॥

21कृष्ण ने जान लिया गोविंद राधे।

22यह करतूत है ब्रह्मा की बता दे॥ 2873॥

23कृष्ण ही ग्वाल गाय गोविंद राधे।

24बछड़े आदि सब बन गये बता दे॥ 2874॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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