Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 250
Reading 261 of 516 · Source nos. 2851–2862 · Source PDF 267
1यमुना के तट पै गोविंद राधे।
2गायों को छोड़ दिया चरने बता दे॥ 2851॥
3कृष्ण ने कहा मित्रों गोविंद राधे।
4अब हम सब खा पी लें बता दे॥ 2852॥
5ग्वालों ने भी कहा गोविंद राधे।
6ठीक है चलो सब खा लें बता दे॥ 2853॥
7सब ग्वाल निज निज गोविंद राधे।
8खाद्य खोलि खोलि लगे खाने बता दे॥ 2854॥
9ग्वालों के बीचों बीच गोविंद राधे।
10बैठे थे बाल गोपाल बता दे॥ 2855॥
11सब ग्वालों के मुख गोविंद राधे।
12थे गोपाल की ओर बता दे॥ 2856॥
13सब की आँखों में गोविंद राधे।
14दर्शन जन्य आनन्द था बता दे॥ 2857॥
15ग्वाल परस्पर आपु ही गोविंद राधे।
16एक दूसरे को हँसाते बता दे॥ 2858॥
17कोई ग्वाल आपु ही गोविंद राधे।
18हँसि हँसि लोट पोट होता बता दे॥ 2859॥
19उस समय कृष्ण की गोविंद राधे।
20झाँकी थी देखने योग्य बता दे॥ 2860॥
21कृष्ण ने मुरली को गोविंद राधे।
22कमर की फेंट में खोंसा बता दे॥ 2861॥
23सींग अरु बेंत को गोविंद राधे।
24बगल में दबाकर रक्खा बता दे॥ 2862॥