Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 246
Reading 257 of 516 · Source nos. 2803–2814 · Source PDF 263
1नंद के आँगन में गोविंद राधे।
2वेदान्त सिद्धान्त नृत्य दिखा दे॥ 2803॥
3ज्ञानी ब्रह्म अलक्षण गोविंद राधे।
4प्रेमी कहे ब्रज आ लक्षण बता दे॥ 2804॥
5गायों के पाछे ब्रह्म गोविंद राधे।
6गोधूलि धूसरित वंशी बजा दे॥ 2805॥
7ज्ञानी ढूँढ़े ब्रह्म वेद गोविंद राधे।
8ब्रह्म ढूँढ़े ब्रज श्यामा ज्ञानी को दिखा दे॥ 2806॥
9दसों दिशाओं में गोविंद राधे।
10श्यामा ही दीखें अद्वैत बता दे॥ 2807॥
11दिव्य प्रेम सिन्धु ऐसा गोविंद राधे।
12ज्ञानी को ही नहिं ब्रह्म को भी डुबा दे॥ 2808॥
13ज्ञानी यदि माने नाहिं गोविंद राधे।
14निराकार ब्रह्म नराकार दिखा दे॥ 2809॥
15ज्ञानी यदि माने नाहिं गोविंद राधे।
16घुटुवनि बल ब्रह्म चलता दिखा दे॥ 2810॥
17ज्ञानी यदि माने नाहिं गोविंद राधे।
18मैया को राई नोन वारते दिखा दे॥ 2811॥
19ज्ञानी यदि माने नाहिं गोविंद राधे।
20ब्रह्म सिर धूरि लगाते दिखा दे॥ 2812॥
21ज्ञानी यदि माने नाहिं गोविंद राधे।
22ब्रह्म तनु पंक लगाते दिखा दे॥ 2813॥
23ज्ञानी यदि माने नाहिं गोविंद राधे।
24मैया को अइया बुलाते दिखा दे॥ 2814॥