Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 245
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1ज्ञानी भी कर्म त्यागी गोविंद राधे।
2भक्त भी वैदिक कर्म त्यागी बता दे॥ 2791॥
3निराकार ब्रह्मज्ञान गोविंद राधे।
4वैदिक धर्म कर्म आपु छुड़ा दे॥ 2792॥
5साकार कृष्ण प्रेम गोविंद राधे।
6निराकार ब्रह्म ज्ञान आपु छुड़ा दे॥ 2793॥
7दिव्यप्रेम बन्धन गोविंद राधे।
8माया मुक्त ज्ञानी को फिर ते बँधा दे॥ 2794॥
9दिव्यप्रेम बन्धन गोविंद राधे।
10ज्ञानी की बिसात क्या है ब्रह्म को बँधा दे॥ 2795॥
11ज्ञानी है अज्ञानी गोविंद राधे।
12ब्रह्म सर्वथा अग्राह्य बता दे॥ 2796॥
13भक्त कह झूठ यह गोविंद राधे।
14आओ ब्रज ऊखल बँधा है दिखा दे॥ 2797॥
15निगमागमों में यदि गोविंद राधे।
16ब्रह्म को ढूँढ़ि थकि गये हो बता दे॥ 2798॥
17तो आ जावो ब्रज गोविंद राधे।
18दिखा दूँ ऊखल बँधा ब्रह्म बता दे॥ 2799॥
19ज्ञानी कहे ब्रह्म व्यापी गोविंद राधे।
20आओ ब्रज नन्दगाँव घर दिखला दे॥ 2800॥
21ज्ञानी है अज्ञानी गोविंद राधे।
22ब्रह्म अगोचर अलख बता दे॥ 2801॥
23भक्त कह गोचर गोविंद राधे।
24आ लख नन्द घर नाचता दिखा दे॥ 2802॥