Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 243
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1निर्गुण भक्ति आदि गोविंद राधे।
2वेदों का महावाक्य श्रवण बता दे॥ 2767॥
3सगुण कृष्ण भक्ति आदि गोविंद राधे।
4श्रीकृष्ण का तत्व श्रवण बता दे॥ 2768॥
5भक्त ज्ञानी भेद यह गोविंद राधे।
6एक रस पिये एक रस ही बना दे॥ 2769॥
7ज्ञानी भक्त भेद यह गोविंद राधे।
8ज्ञानी मन मरे भक्त दिव्य बना दे॥ 2770॥
9ज्ञानी कहे सोऽहं सोऽहं गोविंद राधे।
10प्रेमी कहे सोऽहं के पूर्व “दा” लगा दे॥ 2771॥
11ज्ञानी कहे “मैं ही ब्रह्म” गोविंद राधे।
12भक्त कहे “मेरा ब्रह्म” अन्तर बता दे॥ 2772॥
13जग द्वैत निंदनीय गोविंद राधे।
14कृष्ण प्रेम द्वैत वंदनीय है बता दे॥ 2773॥
15“मैं” रखु “मेरा” रखु गोविंद राधे।
16“मैं दास” “मेरा स्वामी श्याम” है बता दे॥ 2774॥
17मैं दास मेरा स्वामी गोविंद राधे।
18शेष मैं मेरा जो हो वाको मिटा दे॥ 2775॥
19मैं रखु मेरा रखु गोविंद राधे।
20मैं अंश मेरा अंशी श्याम है बता दे॥ 2776॥
21मेरा रखु तेरा रखु गोविंद राधे।
22मेरा तू है तेरा मैं हूँ श्याम बता दे॥ 2777॥
23शंकराचार्य कह गोविंद राधे।
24हरि मैं तेरा तू ना मेरा बता दे॥ 2778॥