Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 242
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1भक्त सारूप्य मुक्ति गोविंद राधे।
2हरि केसमान रूप भक्त को दिला दे॥ 2755॥
3भक्त की सामीप्य मुक्ति गोविंद राधे।
4हरि के ही पास में निवास दिला दे॥ 2756॥
5पाँचों अपवर्ग को तो गोविंद राधे।
6एकमात्र श्रीकृष्ण भक्ति दिला दे॥ 2757॥
7मुक्ति मिल जाये भी तो गोविंद राधे।
8कृष्ण प्रेम सेवा मिले ना बता दे ॥ 2758॥
9पाँचों मुक्तियों ते गोविंद राधे।
10श्रेष्ठ है निष्काम प्रेम बता दे॥ 2759॥
11निष्काम भक्त जो सो गोविंद राधे।
12पाँचों मुक्ति नहिं माँगे माँगे सेवा दे॥ 2760॥
13मैं हूँ निष्काम प्रेमी गोविंद राधे।
14पाँचों मुक्तियों को कोई द्वार ते भगा दे॥ 2761॥
15पाँचों मुक्ति आई हैं गोविंद राधे।
16दासी बनने निष्कामता मिटा दें॥ 2762॥
17मेरा है लक्ष्य एक गोविंद राधे।
18श्यामा श्याम निष्काम प्रेम बता दे॥ 2763॥
19मोक्ष कामना में छुपी गोविंद राधे।
20अहं की मंगल कामना बता दे॥ 2764॥
21श्याम सुख कामना में गोविंद राधे।
22अहं का सर्वथा अभाव हो बता दे॥ 2765॥
23अहं के अभाव ते ही गोविंद राधे।
24ज्ञानी नहिं भक्त निष्काम बता दे॥ 2766॥