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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 241

Reading 252 of 516 · Source nos. 2743–2754 · Source PDF 258

1याते गीता का लक्ष्य गोविंद राधे।

2मोक्ष नाहिं अपितु है प्रेम बता दे॥ 2743॥

3गीता का अन्तिम गोविंद राधे।

4अध्याय मोक्ष संन्यास बता दे॥ 2744॥

5मोक्ष संन्यास अर्थ गोविंद राधे।

6मोक्ष का सर्वथा त्याग है बता दे॥ 2745॥

7मोक्ष काम तजे बिनु गोविंद राधे।

8कृष्ण शुद्ध प्रेम प्राप्ति हो ना बता दे॥ 2746॥

9मुक्ति अभाव वाची गोविंद राधे।

10दुःखनिवृत्ति मात्र होती है बता दे॥ 2747॥

11भक्ति है भाववाची गोविंद राधे।

12प्रेमरस का आस्वादन करा दे॥ 2748॥

13भाव ते ही गोपीजन गोविंद राधे।

14श्रुतिमृग्यमान रस पाया बता दे॥ 2749॥

15भक्ति है भुलाने वाली गोविंद राधे।

16भक्ति भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठ भुला दे॥ 2750॥

17मुक्ति को पिशाची माने गोविंद राधे।

18बैकुण्ठ सुख को भी मुँह बिचका दे॥ 2751॥

19भक्तों की चार मुक्ति गोविंद राधे।

20भक्तों को वैकुण्ठ वास दिला दे॥ 2752॥

21भक्तों की मुक्ति सार्ष्टि गोविंद राधे।

22हरि के समान ऐश्वर्य दिला दे॥ 2753॥

23भक्त सालोक्य मुक्ति गोविंद राधे।

24हरि ही के लोक में निवास दिला दे॥ 2754॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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