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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 240

Reading 251 of 516 · Source nos. 2731–2742 · Source PDF 257

1ज्ञान ते मिले मोक्ष गोविंद राधे।

2भक्ति ते मिले दिव्यप्रेम बता दे॥ 2731॥

3नरक ते श्रेष्ठ स्वर्ग गोविंद राधे।

4स्वर्ग ते श्रेष्ठ अपवर्ग बता दे॥ 2732॥

5अपवर्ग सुख पै गोविंद राधे।

6कोटि कोटि स्वर्ग के सुखों को लुटा दे॥ 2733॥

7अपवर्ग ते श्रेष्ठ गोविंद राधे।

8श्रीकृष्ण निष्काम प्रेम बता दे॥ 2734॥

9श्रीकृष्ण प्रेम पै गोविंद राधे।

10कोटि कोटि अपवर्ग सुख को लुटा दे॥ 2735॥

11ज्ञानी योगी मत में तो गोविंद राधे।

12सायुज्य ही अपवर्ग बता दे॥ 2736॥

13कृष्णभक्त मत में तो गोविंद राधे।

14प्रेम भक्ति अपवर्ग व्यास बता दे॥ 2737॥

15नेकु भक्ति सुख पै गोविंद राधे।

16कोटि कोटि तन मन प्राण लुटा दे॥ 2738॥

17भक्ति सुख लवलेश गोविंद राधे।

18ब्रह्मानन्दी ही क्या ब्रह्म को नचा दे॥ 2739॥

19गीतोपदेशक गोविंद राधे।

20कृष्ण ने दिया पार्थ को क्या बता दे॥ 2740॥

21याते ही सिद्घ होगा गोविंद राधे।

22गीता का अन्तिम लक्ष्य बता दे॥ 2741॥

23महाभारत में गोविंद राधे।

24कहा पार्थ गया गोलोक बता दे॥ 2742॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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