Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 239
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1भक्त वर माँगे हरि गोविंद राधे।
2भुक्ति मुक्ति दोनों डाकिनी ते बचा दे॥ 2719॥
3भुक्ति है अज्ञान गोविंद राधे।
4मुक्ति तो महा अज्ञान बता दे॥ 2720॥
5मुक्ति ते तो भुक्ति भली गोविंद राधे।
6भुक्ति में आशा कोई हरि ते मिला दे॥ 2721॥
7बद्ध को तो आशा है गोविंद राधे।
8काउ जन्म में प्रेम मिलेगा बता दे॥ 2722॥
9मुक्त का तो जन्म हो ना गोविंद राधे।
10याते कभु प्रेम भी ना मिलेगा बता दे॥ 2723॥
11याते मुक्त ते बद्ध गोविंद राधे।
12है श्रेष्ठ चैतन्यदेव बता दे॥ 2724॥
13भुक्ति डाकिनी तो कभु गोविंद राधे।
14छोड़ भी दे मुक्ति कभू न छुड़ा दे॥ 2725॥
15कैतवप्रधान मुक्ति गोविंद राधे।
16चैतन्यदेव ने कहा है बता दे॥ 2726॥
17मुक्ति को पिशाची सम गोविंद राधे।
18वेदव्यास ने कहा सबको बता दे॥ 2727॥
19मोक्ष नरक सम गोविंद राधे।
20भक्ति बिनु, स्वर्ग भी है नरक बता दे॥ 2728॥
21नरक स्वर्ग अरु गोविंद राधे।
22अपवर्ग भक्ति बिनु सम हैं बता दे॥ 2729॥
23पाप ते मिले नरक गोविंद राधे।
24पुण्य ते मिले स्वर्ग लोक बता दे॥ 2730॥