Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 238
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1मुक्ति हरिदासी है गोविंद राधे।
2स्वामी तजि दासी भजे मूर्खता बता दे॥ 2707॥
3श्यामा दास श्याम श्याम गोविंद राधे।
4दासी मुक्ति मुक्तिदास ज्ञानी बता दे॥ 2708॥
5भक्ति के अधीन दोऊ गोविंद राधे।
6मुक्ति बिनु माँगे मिले भक्त ठुकरा दे॥ 2709॥
7हरि कह मुक्ति ले ले गोविंद राधे।
8भक्त कह प्रेमबन्धन में बँधा दे॥ 2710॥
9कृष्ण प्रेम बन्ध ते तो गोविंद राधे।
10भक्त कभी भी मुक्ति चाहे ना बता दे॥ 2711॥
11कृष्ण प्रेमबन्ध ते तो गोविंद राधे।
12जगबन्धनमुक्ति आपु हो बता दे॥ 2712॥
13मुक्ति ठाढ़ी कर जोरे गोविंद राधे।
14भक्त आगे कहे मोहिं दासी बना दे॥ 2713॥
15भक्तों ते चाहे मुक्ति गोविंद राधे।
16दासीपद भक्त डाटि वाय भगा दे॥ 2714॥
17मुक्ति कहे कहाँ जाऊँ गोविंद राधे।
18जहाँ जाऊँ कूकरी ज्योँ भक्त भगा दे॥ 2715॥
19जो थे मेरे दास कभु गोविंद राधे।
20शुक सनकादि मोहिं डाटि के भगा दे॥ 2716॥
21गोपी कहे मुक्ति सुनु गोविंद राधे।
22श्याम कुब्जा में सक्त मुक्त करा दे॥ 2717॥
23भक्ति में भुक्ति मुक्ति गोविंद राधे।
24दोनों हैं बाधा वाय दूर भगा दे॥ 2718॥