Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 237
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1ऐसे ही ज्ञानी की गोविंद राधे।
2समाधि ते मन भागे बता दे॥ 2695॥
3किन्तु भक्तियुक्त मन गोविंद राधे।
4भगाने पै भी नहिं भागे बता दे॥ 2696॥
5भक्ति बिनु मुक्ति नाहिं गोविंद राधे।
6कोटि यतन करो बालू तेल ना दे॥ 2697॥
7भक्ति बिनु मुक्ति नाहिं गोविंद राधे।
8अंधकार चाहे रवि को भी नसा दे॥ 2698॥
9भक्ति बिनु मुक्ति चाहे गोविंद राधे।
10सो कह सूर्य बिनु दिन हो बता दे॥ 2699॥
11भक्ति ते मिले मुक्ति गोविंद राधे।
12कर्म, ज्ञान, योग ते ना मुक्ति बता दे॥ 2700॥
13कर्म, योग, ज्ञान ते तो गोविंद राधे।
14स्वर्ग रिद्धि सिद्धि मिले मुक्ति ना बता दे॥ 2701॥
15भक्ति बिनु मुक्ति ऐसी गोविंद राधे।
16जल बिनु जैसे थल नाव चला दे॥ 2702॥
17ज्ञानियों की स्वामिनी है गोविंद राधे।
18भक्तों की दासी है मुक्ति बता दे॥ 2703॥
19भक्ति तो है ऐसी शक्ति गोविंद राधे।
20भुक्ति मुक्ति दोनों को ही दासी बना दे॥ 2704॥
21भक्ति के अधीन मुक्ति गोविंद राधे।
22मुक्ति के अधीन ज्ञान ज्ञानी को बता दे॥ 2705॥
23भक्ति के दास हरि गोविंद राधे।
24मुक्ति है हरिदासी ज्ञानी को बता दे॥ 2706॥