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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 235

Reading 246 of 516 · Source nos. 2671–2682 · Source PDF 252

1वैराग्य साध्य ज्ञान गोविंद राधे।

2ज्ञान साध्य मोक्ष कैवल्य बता दे॥ 2671॥

3ज्ञानी की कामना है गोविंद राधे।

4दुख की शाश्वती निवृत्ति बता दे॥ 2672॥

5बहुजन्म पश्चात् गोविंद राधे।

6ज्ञानी हो कृष्ण प्रपन्न बता दे॥ 2673॥

7कोई भी ज्ञानी जब गोविंद राधे।

8कृष्ण भक्ति करे मुक्त होय बता दे॥ 2674॥

9“ददामि बुद्धियोगं” श्लोक गोविंद राधे।

10कह हरिभक्त को ज्ञान दिला दे॥ 2675॥

11ज्ञानी की विद्या माया गोविंद राधे।

12कृष्णभक्ति बिनु नहिं जाये बता दे॥ 2676॥

13शंकराचार्य कह गोविंद राधे।

14निर्गुण ब्रह्म उदासीन है बता दे॥ 2677॥

15उदासीन ब्रह्म तो गोविंद राधे।

16कृपा कर ही नाहिं सकता बता दे॥ 2678॥

17अतएव ज्ञानी को गोविंद राधे।

18कृष्णकृपा हेतु भक्ति करा दे॥ 2679॥

19भक्तिहीन शुष्क ज्ञानी गोविंद राधे।

20कृष्ण अपराधी माया पतन करा दे॥ 2680॥

21शुष्क ज्ञानी सत्वगुणी गोविंद राधे।

22सुख को ही ब्रह्म सुख माने बता दे॥ 2681॥

23मन जो भी सोचे समझे गोविंद राधे।

24वेद कह सब है मायिक बता दे॥ 2682॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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