Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 234
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1जो ज्ञानी कृष्ण तनु गोविंद राधे।
2मायिक माने वाय माया नचा दे॥ 2659॥
3जो ज्ञानी ब्रह्म को गोविंद राधे।
4साकार नाहिं माने माया घुमा दे॥ 2660॥
5जो ज्ञानी कृष्ण को गोविंद राधे।
6ब्रह्म मानि भक्ति करे मुक्ति दिला दे॥ 2661॥
7ज्ञान है विरक्ति पर गोविंद राधे।
8भक्ति है श्यामा श्याम स्मृति पर बता दे॥ 2662॥
9पूर्ण विरक्त ही है गोविंद राधे।
10ज्ञान मार्ग अधिकारी ज्ञानी को बता दे॥ 2663॥
11चार साधनों ते युक्त गोविंद राधे।
12ज्ञान मार्ग का अधिकारी बता दे॥ 2664॥
13विवेक वैराग्य गोविंद राधे।
14शमादि षट् मुमुक्षु साधन बता दे॥ 2665॥
15श्रवण मनन पुनि गोविंद राधे।
16निदिध्यासन समाधि अंग बता दे॥ 2666॥
17दुःख मृत्यु आदि ते जो गोविंद राधे।
18छूटना चाहे सो मुमुक्षु बता दे॥ 2667॥
19मुमुक्षु को तो बस गोविंद राधे।
20भक्ति ही ग्राह्य धार्य कार्य बता दे॥ 2668॥
21वैराग्य भेद दो हैं गोविंद राधे।
22युक्त अरु फल्गु वैराग्य बता दे॥ 2669॥
23युक्त वैराग्य ग्राह्य गोविंद राधे।
24फल्गु वैराग्य त्याज्य धोखा बता दे॥ 2670॥