Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 232
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1आवरणात्मिका माया गोविंद राधे।
2जीव का स्वरूप विस्मरण करा दे॥ 2635॥
3विक्षेपात्मिका माया गोविंद राधे।
4जीवों को जग आसक्त करा दे॥ 2636॥
5गुण माया के भेद दो हैं गोविंद राधे।
6एक अविद्या दूजी विद्या बता दे॥ 2637॥
7सत्वगुणी विद्या माया गोविंद राधे।
8रज तम गुण की अविद्या बता दे॥ 2638॥
9ज्ञानी अविद्या नासे गोविंद राधे।
10विद्या ना नसा सके सबको बता दे॥ 2639॥
11विद्या ते अविद्या जाये गोविंद राधे।
12विद्या नहिं जाये विद्या ज्ञानी को हरा दे॥ 2640॥
13विद्या अविद्या माया गोविंद राधे।
14विद्या ते अविद्या विद्या भक्ति ते मिटादे॥ 2641॥
15विद्या अविद्या माया गोविंद राधे।
16जाय तब मिले शुद्ध सत्व बता दे॥ 2642॥
17शुद्धसत्व दिव्यसत्व गोविंद राधे।
18मायिक सत्व गुण वाला ना बता दे॥ 2643॥
19सत्व गुण वाला सत्व गोविंद राधे।
20विद्या माया युक्त अशुद्ध बता दे॥ 2644॥
21मन शुद्ध कर भी लो गोविंद राधे।
22मिलेगी स्वरूप शक्ति भक्ति ते बता दे॥ 2645॥
23स्वरूप शक्ति ही गोविंद राधे।
24मन दिव्य करे विद्या माया भगा दे॥ 2646॥