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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 228

Reading 239 of 516 · Source nos. 2587–2598 · Source PDF 245

1कोई नदी पार करे गोविंद राधे।

2निज भुजबल तैर कर ही बता दे॥ 2587॥

3कोई नदी पार करे गोविंद राधे।

4आपु नाव चालक बन कर बता दे॥ 2588॥

5भक्त बस बैठा रहे गोविंद राधे।

6नाव पै नाविक हरि को बना दे॥ 2589॥

7ज्ञानी कपि शिशु सम गोविंद राधे।

8भक्त बिलार शिशु सम है बता दे॥ 2590॥

9मेरा भक्त साधक गोविंद राधे।

10गिरे नहिं मैं ही सँभालूँ बता दे॥ 2591॥

11हरि का अपक्वभक्त गोविंद राधे।

12यदि गिर जाये हरि फिर ते उठा दे॥ 2592॥

13भक्त की तो रक्षा करे गोविंद राधे।

14जोगी ज्ञानी आदि को तो माया मिटा दे॥ 2593॥

15“यमेवैष वृणुते” गोविंद राधे।

16मन्त्र कह हरि कृपा हरि ते मिला दे॥ 2594॥

17ज्ञानी का ब्रह्म तो है गोविंद राधे।

18उदासीन करुणारहित बता दे॥ 2595॥

19याते ज्ञानियों को तो गोविंद राधे।

20कृष्ण कृपा की हो अपेक्षा बता दे॥ 2596॥

21ब्रह्मज्ञानी जैसे गोविंद राधे।

22गुणमयी माया ते मुक्त हो बता दे॥ 2597॥

23ऐसे ही कृष्णभक्त गोविंद राधे।

24दैवी माया ते मुक्त हो बता दे॥ 2598॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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