लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 227

Reading 238 of 516 · Source nos. 2575–2586 · Source PDF 244

1परिणाम मृत्यु बाद गोविंद राधे।

2भरत को मिली योनि हिरन बता दे॥ 2575॥

3फिर बने ब्राह्मण गोविंद राधे।

4पागल बनि हरिभक्ति की बता दे॥ 2576॥

5फिर गये हरिधाम गोविंद राधे।

6यह कहानी ज्ञानी भरत की बता दे॥ 2577॥

7ज्ञानी योगी हैं अधूरे गोविंद राधे।

8पूरे होने को कृष्णभक्ति बता दे॥ 2578॥

9हरि की कृपा बिनु गोविंद राधे।

10माया की निवृत्ति नहिं होय बता दे॥ 2579॥

11हरि की कृपा बिनु गोविंद राधे।

12माया की निवृत्ति खपुष्पवत् बता दे॥ 2580॥

13हरि की कृपा बिनु गोविंद राधे।

14जीवन्मुक्त को भी माया नचा दे॥ 2581॥

15“ज्ञानं क्षरति” मनु गोविंद राधे।

16कह माया ज्ञानी का पतन करा दे॥ 2582॥

17जो शिशु पिता कर गोविंद राधे।

18पकरि चले वह गिरे भी बता दे॥ 2583॥

19जो पिता शिशु कर गोविंद राधे।

20पकरि चले सो निर्भय बता दे॥ 2584॥

21ज्ञानी चले निजबल गोविंद राधे।

22भक्त चले हरिबल अन्तर बता दे॥ 2585॥

23नदी पार करने के गोविंद राधे।

24साधन तीन संसार में बता दे॥ 2586॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version