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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 226

Reading 237 of 516 · Source nos. 2563–2574 · Source PDF 243

1हरि ज्ञान ते हो भक्ति गोविंद राधे।

2भक्ति ते ब्रह्मज्ञान आप हो बता दे॥ 2563॥

3भक्ति सहित ज्ञान गोविंद राधे।

4ब्रह्मज्ञान अरु अपवर्ग दिला दे॥ 2564॥

5भक्ति के बिना अधूरे गोविंद राधे।

6ज्ञानी, ब्रह्मज्ञान वाको पतन करा दे॥ 2565॥

7भक्तिहीन ब्रह्मज्ञान गोविंद राधे।

8जीवनमुक्त का भी पतन करा दे॥ 2566॥

9भक्तिहीन ब्रह्म ज्ञान गोविंद राधे।

10जड़ भरत को भी तन हिरन दिला दे॥ 2567॥

11ज्ञानी कहे माया मिथ्या गोविंद राधे।

12भरत से ज्ञानी को भी धूल चटा दे॥ 2568॥

13भरत ने राज्य किया गोविंद राधे।

14एक करोड़ वर्ष भू पै बता दे॥ 2569॥

15सिंह के भय ते गोविंद राधे।

16एक हिरणी कूदी नदी में बता दे॥ 2570॥

17हिरणी का बच्चा गिरा गोविंद राधे।

18बहती नदी के पानी में बता दे॥ 2571॥

19भरत को दया आई गोविंद राधे।

20बच्चे को पकड़ा नदी ते बता दे॥ 2572॥

21भरत ने पाला पोसा गोविंद राधे।

22हिरणी केबच्चे को शिशु ज्यों बता दे॥ 2573॥

23याते भरत भये गोविंद राधे।

24हिरणी शावक सक्त बता दे॥ 2574॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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