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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 225

Reading 236 of 516 · Source nos. 2551–2562 · Source PDF 242

1भक्ति बिनु ज्ञान ऐसे गोविंद राधे।

2गगन में फूलों की वाटिका लगा दे॥ 2551॥

3भक्ति बिनु ज्ञान ऐसे गोविंद राधे।

4दिन में भी आँखों ते तारे दिखा दे॥ 2552॥

5भक्ति बिनु ज्ञान ऐसे गोविंद राधे।

6गूँगे को जैसे वेदवक्ता बना दे॥ 2553॥

7भक्ति बिनु ज्ञान ऐसे गोविंद राधे।

8जैसे कोइ ला के शश शंृग दिखा दे॥ 2554॥

9भक्तिहीन ज्ञान ऐसे गोविंद राधे।

10जैसे बिना सींग पूँछ बैल बता दे॥ 2555॥

11भक्त कह ज्ञानी ते गोविंद राधे।

12ज्ञान सिर भक्ति का मुकुट पिन्हा दे॥ 2556॥

13प्रेम बिनु ज्ञानी ज्ञान गोविंद राधे।

14जैसे बिनु प्राण देह सबको बता दे॥ 2557॥

15वेदव्यास ने कहा गोविंद राधे।

16भक्ति बिनु मन भी ना शुद्ध हो बता दे॥ 2558॥

17शंकराचार्य कह गोविंद राधे।

18वेदव्यास नारायण हैं बता दे॥ 2559॥

19ब्रह्मसूत्र भाष्य में तो गोविंद राधे।

20शंकर व्यास जी को भ्रांत बता दे॥ 2560॥

21शंकर कहे ज्ञान गोविंद राधे।

22हरि की कृपा ते ही होगा बता दे॥ 2561॥

23हरि की कृपा ते युक्त गोविंद राधे।

24ज्ञान ही ज्ञानी को मोक्ष दिला दे॥ 2562॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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