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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

योग · पृष्ठ 219

Reading 230 of 516 · Source nos. 2489–2500 · Source PDF 236

1योगियों का ध्यान तो है गोविंद राधे।

2फल प्राप्ति पर्यन्त योगी को बता दे॥ 2489॥

3भक्तों का ध्यान तो है गोविंद राधे।

4श्रीकृष्ण का सदा सदा को बता दे॥ 2490॥

5योगियों का ध्यान तो है गोविंद राधे।

6परमात्मा चतुर्भुज रूप बता दे॥ 2491॥

7परमात्मा तो है गोविंद राधे।

8शंख, चक्र, गदा, पद्म धारी बता दे॥ 2492॥

9क्षीर सागर मध्य गोविंद राधे।

10चतुर्भुज रूप में मन को लगा दे॥ 2493॥

11योगियों का ध्येय तो है गोविंद राधे।

12श्रीकृष्ण अंश परमात्मा बता दे॥ 2494॥

13अतएव सिद्ध योगी गोविंद राधे।

14कृष्ण सौन्दर्य लखि योग भुला दे॥ 2495॥

15नव योगीेश्वरों ने गोविंद राधे।

16ब्रह्मा ते सुना, गुण कृष्ण के बता दे॥ 2496॥

17नव योगीेश्वरों ने गोविंद राधे।

18शिव ते सुना, गुण कृष्ण के बता दे॥ 2497॥

19नव योगीश्वरों ने गोविंद राधे।

20सुना हरि गुण नारद ते बता दे॥ 2498॥

21तीन पाँच नौ ग्यारह गोविंद राधे।

22सब तत्व हैं अट्ठाइस बता दे॥ 2499॥

23तीन तत्व माया के गोविंद राधे।

24सत्व, रज, तम तीन गुण हैं बता दे॥ 2500॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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