Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
योग · पृष्ठ 217
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1एक सिद्धि है वशित्व गोविंद राधे।
2सिद्ध करे वशीभूत सृष्टि को बता दे॥ 2465॥
3एक सिद्धि प्राकाम्या गोविंद राधे।
4सिद्ध मिट्टी में भी डुबकी लगा दे॥ 2466॥
5कामावशायिता ते गोविंद राधे।
6सिद्ध हो सत्यसंकल्प बता दे॥ 2467॥
7उपर्युक्त सिद्धियों की गोविंद राधे।
8प्राप्ति हित योगी चित चपल बता दे॥ 2468॥
9आठ सिद्धियाँ हैं व्यर्थ गोविंद राधे।
10सच्ची सिद्धि है सिद्ध भक्ति बता दे॥ 2469॥
11ज्ञानेश्वर योग ते गोविंद राधे।
12कुँए में जाकर पानी पिये थे बता दे॥ 2470॥
13नामदेव भक्ति ते गोविंद राधे।
14पानी आया ऊपर पिये थे बता दे॥ 2471॥
15त्रिभुवन विजयी जो गोविंद राधे।
16रावणादि को भी तृप्ति हुई ना बता दे॥ 2472॥
17हरि में हैं सिद्धि पूर्ण गोविंद राधे।
18सिद्धों में सिद्धि तो आंशिक बता दे॥ 2473॥
19रिद्धि पा ले सिद्धि पा ले गोविंद राधे।
20माया कभु नहिं जाये सब को बता दे॥ 2474॥
21जुग जुग योग करे गोविंद राधे।
22तभू माया नहिं जाये योगी को बता दे॥ 2475॥
23ब्रह्मा ने भी योगबल गोविंद राधे।
24युगों खोजा ब्रह्म ना पाया बता दे॥ 2476॥