Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कर्म · पृष्ठ 210
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1कामी, क्रोधी, लोभी को गोविंद राधे।
2अनुकरणीय रामचरित बता दे॥ 2397॥
3कर्मी के कर्मों का गोविंद राधे।
4फल भी मिले ना बिनु भक्ति बता दे॥ 2398॥
5दया अहिंसा आदि गोविंद राधे।
6शास्त्र वेद सम्मत सत्य बता दे॥ 2399॥
7सत्य दया युक्त धर्म गोविंद राधे।
8तप युक्त ज्ञान मन शुद्ध ना करा दे॥ 2400॥
9धर्म तो पाप नासे गोविंद राधे।
10मन की तो शुद्धि कृष्णभक्ति करा दे॥ 2401॥
11भक्ति मन शुद्ध करे गोविंद राधे।
12सत्य ब्रह्मचर्य आदि गुण भी दिला दे॥ 2402॥
13हरिभक्ति के बिना गोविंद राधे।
14सत्य अहिंसा गुण सपना बता दे॥ 2403॥
15कर्म, योग, ज्ञान ते जो गोविंद राधे।
16मिले भक्ति सब कछु आपु दिला दे॥ 2404॥
17भक्ति तो है कल्प वृक्ष गोविंद राधे।
18जो भी जो भी चाहे भक्ति सब ही दिला दे॥ 2405॥
19रिद्धि सिद्धि मोक्ष आदि गोविंद राधे।
20भक्ति ते मिले आपु भक्त ठुकरा दे॥ 2406॥
21शिव ने बताया यह गोविंद राधे।
22नरक स्वर्ग सम अपवर्ग बता दे॥ 2407॥
23कर्मी माँगे स्वर्ग ज्ञानी गोविंद राधे।
24माँगे मुक्ति भक्त माँगे भक्ति बता दे॥ 2408॥