Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कर्म · पृष्ठ 206
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1वेद के व्रत व्यर्थ गोविंद राधे।
2क्योंकि हम कृष्ण ते हैं विमुख बता दे॥ 2349॥
3सर्व धर्म मूल कृष्ण गोविंद राधे।
4कृष्ण बिनु धर्म भी अधर्म बता दे॥ 2350॥
5वेदों पुराणों के गोविंद राधे।
6आदि मध्य अंत में हैं हरि ही बता दे॥ 2351॥
7स्कंद पुराण कह गोविंद राधे।
8हरिभक्त सर्वधर्मकर्ता बता दे॥ 2352॥
9जो हरिभक्त नहिं गोविंद राधे।
10वह सर्वपापकर्ता है बता दे॥ 2353॥
11पद्म पुराण कह गोविंद राधे।
12हरि के निमित्त पाप धर्म है बता दे॥ 2354॥
13पुनि कह हरि तजि गोविंद राधे।
14वैदिक धर्म भी है पाप बता दे॥ 2355॥
15सच्चा कर्म धर्म सोई गोविंद राधे।
16हरि गुरु पद ते जो प्रेम करा दे॥ 2356॥
17पार्थ ने दयावश गोविंद राधे।
18कहा था युद्ध नहिं करूँगा बता दे॥ 2357॥
19कृष्ण ने कहा पार्थ गोविंद राधे।
20ऐसी दया अनार्यजुष्ट बता दे॥ 2358॥
21कृष्ण ने कहा पार्थ गोविंद राधे।
22ऐसी दया अस्वर्ग्य बता दे॥ 2359॥
23कृष्ण ने कहा पार्थ गोविंद राधे।
24ऐसी दया महापाप बता दे॥ 2360॥