Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कर्म · पृष्ठ 205
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1आप की वाणी वेद गोविंद राधे।
2आप ही उसे करें सत्य बता दे॥ 2337॥
3भाई बंधु पति पुत्र गोविंद राधे।
4अब मुझे स्वीकार करें ना बता दे॥ 2338॥
5हम सब आपकी ही गोविंद राधे।
6शरण आ गई हैं त्यागो ना बता दे॥ 2339॥
7कृष्ण कह देवियों गोविंद राधे।
8कोई करेगा नहिं त्याग बता दे॥ 2340॥
9सारा जग देगा गोविंद राधे।
10मान क्योंकि तुम मेरी भक्त हो बता दे॥ 2341॥
11जाकर घर में ही गोविंद राधे।
12मेरी भक्ति करो सतत बता दे॥ 2342॥
13कृष्ण की आज्ञा को गोविंद राधे।
14मान कर देवियाँ लौटीं बता दे॥ 2343॥
15यज्ञ पुरुषों ने भी गोविंद राधे।
16पत्नियों को अपनाया बता दे॥ 2344॥
17एक यज्ञ पत्नी को गोविंद राधे।
18पति ने रोका हठात बता दे॥ 2345॥
19उसने कृष्ण ध्यान करि गोविंद राधे।
20तनु त्यागा गई कृष्ण पास बता दे॥ 2346॥
21मथुरा के याज्ञिकों ने गोविंद राधे।
22कहा उच्च कुल जन्म व्यर्थ है बता दे॥ 2347॥
23वेदाध्ययन व्यर्थ गोविंद राधे।
24बड़े बड़े यज्ञ आदि व्यर्थ बता दे॥ 2348॥