Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कर्म · पृष्ठ 203
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1अतएव प्रार्थना है गोविंद राधे।
2कछु भोजन दे दीजिये बता दे॥ 2313॥
3यज्ञ-पत्नियाँ थीं भक्त गोविंद राधे।
4उनकी थी दर्शन लालसा बता दे॥ 2314॥
5अतएव पत्नियों ने गोविंद राधे।
6व्यंजन विविध संग ले लिया बता दे॥ 2315॥
7भाई बन्धु पति पुत्र गोविंद राधे।
8चाहा रोकना किन्तु रुकीं ना बता दे॥ 2316॥
9जैसे सब नदियाँ गोविंद राधे।
10भागें समुद्र की ओर बता दे॥ 2317॥
11ऐसे ही भागीं सब गोविंद राधे।
12यज्ञ-पत्नियाँ दर्शन को बता दे॥ 2318॥
13अस्तु उन सब ने गोविंद राधे।
14आके देखा श्याम राम को बता दे॥ 2319॥
15श्याम के शरीर पै गोविंद राधे।
16झिलमिलाता पीत पट था बता दे॥ 2320॥
17गले में बनमाला गोविंद राधे।
18सिर पै मोर मुकुट था बता दे॥ 2321॥
19नटवर भेष कृष्ण गोविंद राधे।
20अंग अंग कोटि अनंग लुटा दे॥ 2322॥
21एक हाथ ग्वाल कंधे गोविंद राधे।
22दूजे हाथ में था कमल बता दे॥ 2323॥
23कानों में कुंडल गोविंद राधे।
24गोल कपोलनि अलक बता दे॥ 2324॥