Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कर्म · पृष्ठ 201
Reading 212 of 516 · Source nos. 2289–2300 · Source PDF 218
1अतएव तुम दोनों गोविंद राधे।
2भूख मारने का करो यत्न बता दे॥ 2289॥
3ग्वालों की प्रार्थना को गोविंद राधे।
4श्याम ने सुना पुनि सोचा बता दे॥ 2290॥
5भक्त यज्ञ-पत्नियों पै गोविंद राधे।
6कृपा करने का समय आ गया बता दे॥ 2291॥
7श्याम ने कहा मित्रों गोविंद राधे।
8थोड़ी दूर पै याज्ञिक हैं बता दे॥ 2292॥
9वे सब स्वर्ग हित गोविंद राधे।
10आंगिरस यज्ञ कर रहे हैं बता दे॥ 2293॥
11तुम सब एक सँग गोविंद राधे।
12जावो उनकी यज्ञशाला बता दे॥ 2294॥
13मेरा अरु भैया का गोविंद राधे।
14नाम लेकर खाद्य माँगो बता दे॥ 2295॥
15राम श्याम आज्ञा ते गोविंद राधे।
16गये ग्वाल ढिग याज्ञिकों के बता दे॥ 2296॥
17ग्वालों ने याज्ञिकों ते गोविंद राधे।
18कहा हम सब हैं भूखे बता दे॥ 2297॥
19राम श्याम आज्ञा ते गोविंद राधे।
20कछु खाद्य माँगने आये हैं बता दे॥ 2298॥
21ग्वालों की प्रार्थना को गोविंद राधे।
22सुनकर भी किया अनसुना बता दे॥ 2299॥
23यज्ञ आदि के लक्ष्य गोविंद राधे।
24एकमात्र हैं श्री कृष्ण बता दे॥ 2300॥