Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कर्म · पृष्ठ 200
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1धर्म, अर्थ, काम आदि गोविंद राधे।
2कृष्ण प्रीत्यर्थ करणीय बता दे॥ 2277॥
3हरि के निमित्त जो हो गोविंद राधे।
4कर्म वही कर्म यह कर्मी को बता दे॥ 2278॥
5“यत्करोषि” गीता श्लोक गोविंद राधे।
6श्रीकृष्ण को कर्म अर्पण बता दे॥ 2279॥
7“मदर्थमपि” गीता श्लोक गोविंद राधे।
8ईश्वर निमित्त कर्म करना बता दे॥ 2280॥
9“मत्कर्मकृत्” श्लोक गोविंद राधे।
10श्रीकृष्ण का ही कर्म करना बता दे॥ 2281॥
11जिस कर्म धर्म ते हो गोविंद राधे।
12श्यामा श्याम तुष्टि वही कर्म बता दे॥ 2282॥
13जो कर्म करने ते गोविंद राधे।
14श्याम प्रेम ना हो वाय श्रम ही बता दे॥ 2283॥
15सब साधन शून्य सम गोविंद राधे।
16प्रेम अंक बिनु सब शून्य बता दे॥ 2284॥
17सब साधन फल गोविंद राधे।
18प्रेम, प्रेम बिनु फल श्रमहिं बता दे॥ 2285॥
19ग्वाल बालों ने कहा गोविंद राधे।
20राम श्याम तुम बलशाली हो बता दे॥ 2286॥
21बड़े बड़े दैत्यों को गोविंद राधे।
22तुम दोनों ने ही मारा बता दे॥ 2287॥
23हम सब ग्वालों के गोविंद राधे।
24पेट की भूख भी है दैत्य बता दे॥ 2288॥