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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

कर्म · पृष्ठ 199

Reading 210 of 516 · Source nos. 2265–2276 · Source PDF 216

1वर्णाश्रम धर्म गोविंद राधे।

2कोई माने कोई माने ना बता दे॥ 2265॥

3किन्तु श्रीकृष्ण भक्ति गोविंद राधे।

4सबको ही करनी पड़ेगी बता दे॥ 2266॥

5चार वर्ण चार आश्रम गोविंद राधे।

6सब में ही भक्ति अनिवार्य बता दे॥ 2267॥

7ब्रह्मचारी को भी गोविंद राधे।

8हरिभक्ति है अनिवार्य बता दे॥ 2268॥

9गृहस्थ को भी है गोविंद राधे।

10हरिभक्ति अति अनिवार्य बता दे॥ 2269॥

11वानप्रस्थी को भी गोविंद राधे।

12कृष्णभक्ति परमानिवार्य बता दे॥ 2270॥

13संन्यासी को भी गोविंद राधे।

14हरिभक्ति अति अनिवार्य बता दे॥ 2271॥

15संन्यासी का धर्म गोविंद राधे।

16शान्ति अहिंसा मुख्य है बता दे॥ 2272॥

17वाणप्रस्थी धर्म गोविंद राधे।

18तप अरु भगवद्भाव बता दे॥ 2273॥

19गृहस्थ का धर्म गोविंद राधे।

20प्राणियों की रक्षा यज्ञ आदि बता दे॥ 2274॥

21ब्रह्मचारी धर्म गोविंद राधे।

22आचार्य सेवा है मुख्य बता दे॥ 2275॥

23कृष्ण उपासना तो गोविंद राधे।

24सब आश्रमों में है प्रमुख बता दे॥ 2276॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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