Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कर्म · पृष्ठ 198
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1तामस दान फल गोविंद राधे।
2विविध यातना का नरक दिला दे॥ 2253॥
3हरि हरिजन प्रति गोविंद राधे।
4दान फल तो गोलोक दिला दे॥ 2254॥
5सर्वस्व दान फल गोविंद राधे।
6गुरु हरिश्चन्द्र को हरि ते मिला दे॥ 2255॥
7तन हित धन राखे गोविंद राधे।
8अधिक जो राखे वेद चोर बता दे॥ 2256॥
9चोरी चोरी दान करे गोविंद राधे।
10भूलेहुँ मन अभिमान न ला दे॥ 2257॥
11पुण्य बताने ते ही गोविंद राधे।
12ययाति का स्वर्ग छिना था बता दे॥ 2258॥
13हरि को जो दान करु गोविंद राधे।
14हरि दे अनन्त गुना फल बता दे॥ 2259॥
15पाप न दान करु गोविंद राधे।
16पाप का फल भी अनन्त हो बता दे॥ 2260॥
17भक्तिहीन धर्म कर्म गोविंद राधे।
18प्राण रहित जनु शव है बता दे॥ 2261॥
19वर्ण आश्रम धर्म गोविंद राधे।
20फल है मायिक नश्वर बता दे॥ 2262॥
21वर्णाश्रम धर्म गोविंद राधे।
22लोक यात्रा हित अपर बता दे॥ 2263॥
23किन्तु कृष्ण भक्ति तो गोविंद राधे।
24आत्म कल्याण हित पर है बता दे॥ 2264॥