Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कर्म · पृष्ठ 197
Reading 208 of 516 · Source nos. 2241–2252 · Source PDF 214
1सतयुग में धर्म पाद गोविंद राधे।
2सत्य, दया, तप, दान चार हैं बता दे॥ 2241॥
3झूठ हिंसा तृष्णा अरु गोविंद राधे।
4द्वेष, अधर्म चार पाद हैं बता दे॥ 2242॥
5त्रेता में अधर्म पाद गोविंद राधे।
6धर्म का चतुर्थांश क्षीण करा दे॥ 2243॥
7द्वापर अधर्म पाद गोविंद राधे।
8धर्म का अर्धांश क्षीण करा दे॥ 2244॥
9कलि में अधर्म पाद गोविंद राधे।
10धर्म का चतुर्थांश ही करवा दे॥ 2245॥
11कलियुग अन्त में तो गोविंद राधे।
12धर्म के चारों पाद पूर्ण मिटा दे॥ 2246॥
13औैर जुग में तो धर्म गोविंद राधे।
14यज्ञ आदि थे कलि दान बता दे॥ 2247॥
15प्रजापति सुत तीन गोविंद राधे।
16देव मानव अरु दानव बता दे॥ 2248॥
17ब्रह्मा तो द द द ते गोविंद राधे।
18दम दान दया तीनों सुत को बता दे॥ 2249॥
19तीन गुण, निर्गुण गोविंद राधे।
20चार पात्र चार फल, दान दिला दे॥ 2250॥
21सात्विक दान फल गोविंद राधे।
22मायिक नश्वर स्वर्ग दिला दे॥ 2251॥
23राजस दान फल गोविंद राधे।
24मायिक मानवलोक दिला दे॥ 2252॥