Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कर्म · पृष्ठ 196
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1सत्व ते निकृष्ट रज गोविंद राधे।
2लाल वर्ण फल मृत्युलोक दिला दे॥ 2229॥
3रज ते निकृष्ट तम गोविंद राधे।
4कृष्ण वर्ण फल याको नरक पठा दे॥ 2230॥
5गुणातीत हरि गुरु गोविंद राधे।
6उनके प्रपन्न हो जा साध्य दिला दे॥ 2231॥
7सत्वगुणी पहिचान गोविंद राधे।
8मानस शान्ति जितेन्द्रिय बता दे॥ 2232॥
9रजोगुणी पहिचान गोविंद राधे।
10जगत की नाना कामना बता दे॥ 2233॥
11तमोगुणी पहिचान गोविंद राधे।
12परपीड़न क्रोध हिंसा बता दे॥ 2234॥
13काष्ठ ते धुवाँ श्रेष्ठ गोविंद राधे।
14धुवें ते भी श्रेष्ठ अग्नि है बता दे॥ 2235॥
15ऐसे तम ते रज गोविंद राधे।
16रज ते भी श्रेष्ठ सत्व गुण है बता दे॥ 2236॥
17सत्व गुणी को मृत्यु गोविंद राधे।
18दुःखोदर्क नश्वर स्वर्ग दिला दे॥ 2237॥
19रजोगुणी को मृत्यु गोविंद राधे।
20मृत्युलोक में ही नरदेह दिला दे॥ 2238॥
21तमोगुणी को मृत्यु गोविंद राधे।
22नाना दुःखयुक्त भोग नरक करा दे॥ 2239॥
23निर्गुणी को मृत्यु गोविंद राधे।
24ससम्मान हरि के धाम पठा दे॥ 2240॥