Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कर्म · पृष्ठ 194
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1वृत्र विधिदोष ते ही गोविंद राधे।
2इन्द्र का न बध कर पाया था बता दे॥ 2205॥
3वेद विधि दोष ते ही गोविंद राधे।
4काशी राज आपु मारा गया था बता दे॥ 2206॥
5प्रह्लाद बच गया गोविंद राधे।
6मरा था पुरोहित विधिदोष ते बता दे॥ 2207॥
7वेद जाको विधि कहे गोविंद राधे।
8वेद मर्मज्ञ वाको पुण्य बता दे॥ 2208॥
9वेद में निषेध जो है गोविंद राधे।
10वेद मर्मज्ञ वाको पाप बता दे॥ 2209॥
11पुण्य पाप दोनों तजु गोविंद राधे।
12श्यामा श्याम दोनों भजु काम बना दे॥ 2210॥
13सब तजो हरि भजो गोविंद राधे।
14यही वेद का निषेध विधि है बता दे॥ 2211॥
15हरिभक्ति बिनु कर्मी गोविंद राधे।
16यदि गिर जाये गया काम ते बता दे॥ 2212॥
17भक्ति साधक ते जो गोविंद राधे।
18विकर्म भी हो हरि शुद्ध करा दे॥ 2213॥
19सुख भोग ते तो हो गोविंद राधे।
20पूर्व कृत पुण्य का विनाश बता दे॥ 2214॥
21दुःख भोग ते तो हो गोविंद राधे।
22पूर्व कृत पाप का विनाश बता दे॥ 2215॥
23जीव दुराचारी भी गोविंद राधे।
24पूर्व सत्कर्म फल पावे बता दे॥ 2216॥