Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
महापुरुष · पृष्ठ 184
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1वेद हरि रूप किन्तु गोविंद राधे।
2भक्त वेदसिर पै पैर धरा दे॥ 2112॥
3“यान्यस्माकं” मंत्र गोविंद राधे।
4कह सुचरित अनुकरण करा दे॥ 2113॥
5समर्थ भक्तों में गोविंद राधे।
6धर्म का व्यतिक्रम हुआ है बता दे॥ 2114॥
7किन्तु अनुकरण गोविंद राधे।
8मन ते भी कोई करे ना बता दे॥ 2115॥
9शिव ने पिया था विष गोविंद राधे।
10नीलकण्ठ की उपाधि पाके मुसका दे॥ 2116॥
11अनुकरण तो बस गोविंद राधे।
12निज कक्षा अनुसार हो बता दे॥ 2117॥
13गुरु करे जानि के गोविंद राधे।
14पानी पिये छानि के ज्ञानी बता दे॥ 2118॥
15जब लौं न मिले गुरु गोविंद राधे।
16रो के कहो हरि तू ही गुरु ते मिला दे॥ 2119॥
17नाम में है सर्वशक्ति गोविंद राधे।
18मंत्रदान दीक्षा की अपेक्षा ना बता दे॥ 2120॥
19मंत्रदान लै के करे गोविंद राधे।
20घोर पाप वाय नामापराध बता दे॥ 2121॥
21वैधी भक्ति की गोविंद राधे।
22पूजा में दीक्षा अनिवार्य बता दे॥ 2122॥
23रागानुगा में तो गोविंद राधे।
24दीक्षा आदि अनिवार्य ना बता दे॥ 2123॥