Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
महापुरुष · पृष्ठ 183
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1भक्त के भीतर देखो गोविंद राधे।
2बाहर का देखना है धोखा बता दे॥ 2100॥
3गुरु तन जनि देखो गोविंद राधे।
4मन देखो प्रेमधन प्रेमी बना दे॥ 2101॥
5खग जाने खगभाषा गोविंद राधे।
6रसिक की बात जाने रसिक बता दे॥ 2102॥
7साधक सिद्ध दोनों गोविंद राधे।
8अपने को महापापी बता दे॥ 2103॥
9जो है महापापी सो गोविंद राधे।
10आपु को आपु निष्पाप बता दे॥ 2104॥
11जीव कल्याण हित गोविंद राधे।
12सिद्घ भी मायाबद्ध अभिनय करा दे॥ 2105॥
13हरि हरिजन का तो गोविंद राधे।
14एक लक्ष्य लोककल्याण बता दे॥ 2106॥
15मायाधीन लेना जाने गोविंद राधे।
16हरि गुरु देना जानें तत्व बता दे॥ 2107॥
17सिद्ध भक्त आचरण गोविंद राधे।
18अनुकरणीय नहिं होते बता दे॥ 2108॥
19उच्च साधकों के भी गोविंद राधे।
20अनुकरणीय आचरण ना बता दे॥ 2109॥
21गुरु आदेश ते ही गोविंद राधे।
22अधिकार युक्त आचरण बता दे॥ 2110॥
23गुणातीत स्थितप्रज्ञ गोविंद राधे।
24वेद विधि निषेध ते परे है बता दे॥ 2111॥